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#अब विदेश जाने के लिए वीजा की जरूरत नहीं 2023

#अब विदेश जाने के लिए वीजा की जरूरत नहीं क्या ऐसा हो सकता है ?2023 update

बांग्लादेश भूटान इंडिया म्यामार नेपाल श्रीलंका थाईलैंड सारे बॉर्डर को खोल दो यह स्टेटमेंट आया है श्रीलंका के प्रेसिडेंट की तरफ से उन्होंने कहा है की जो बिम्सटेक देश हैं उनको आपस में जोड़ने के लिए तथा सारे देशों की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए सबके बॉर्डर फ्री कर दिए जाएं

 

file photo

 

बिम्सटेक के बारे में आप जानते ही होंगे अगर नहीं जानते हैं तो हम बताते हैं कि यह 7 देशों का ग्रुप है जिसमें इंडिया बांग्लादेश भूटान म्यांमार नेपाल श्रीलंका और थाईलैंड आते हैं बिम्सटेक की फुल फॉर्म है
Bimstec=the bay of bengal initiative for multi sectoral technical and economic cooperation

 

      अब विदेश जाने के लिए वीजा की जरूरत नहीं क्या ऐसा हो सकता है ?2023 update

अब श्रीलंका के प्रेसिडेंट ने कहा है की इन सब देशों के बीच का कोई नागरिक अगर दूसरे देश घूमना चाहता हो तो बिना वीजा बिना रिस्ट्रिक्शन के वह दूसरे देश जा सके यह आइडिया बहुत यूनिक है दुनिया के कुछ इलाकों में यह आइडिया काम भी कर रहा है तो डिस्कस करेंगे की यह इंडिया के मामले में भी कारगर साबित होगा ?

 

 

 

यह आइडिया है श्रीलंका के प्रेसिडेंट का

वर्ष 1997 में सामाजिक विकास व आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए बिम्सटेक का निर्माण किया गया श्रीलंका के प्रेसिडेंट का जो आईडिया है उसके बारे में हम जानते हैं मान लेते हैं कि श्रीलंका का कोई व्यक्ति है जो इंडिया के अंदर नौकरी करना चाहता है और लंबे समय के लिए नौकरी पर रहना चाहता है तो उसके लिए किसी तरह का वीजा संबंधी रुकावट पैदा ना हो या फिर इंडिया के अलावा जो बिम्सटेक के साथ देश हैं उनमें से किसी भी देश का व्यक्ति किसी अन्य देश में जाकर नौकरी कर सकता है यह आइडिया है श्रीलंका के प्रेसिडेंट का अभी फिलहाल के लिए बिम्सटेक में से दो ही देश ऐसे हैं जो इंडिया को फ्री वीजा प्रोवाइड करते हैं जिसमें नेपाल और भूटान है बाकी सब जो कंट्री है चाहे श्रीलंका हो म्यामार हो थाईलैंड हो या फिर बांग्लादेश है इन सब में जाने के लिए वीजा जरूरी है या फिर और कंट्री यों के लिए भी यही चीज लागू होती है बिम्सटेक के देशों में जाने के लिए विक्रम सिंह के यह आईडिया दे रहे हैं की ओपन बॉर्डर होना चाहिए एक देश से दूसरे देश में जाने के लिए यह बहुत ही यूनिक कांसेप्ट है और पुराना भी है कई इलाके दुनिया में अभी मौजूद है जो की इस कानून को लागू कर चुके हैं

 

 

 

एक देश का नागरिक दूसरे देश में जाकर लंबे समय के लिए नौकरी करना

अगर हम उदाहरण के लिए देखें तो नंबर एक उदाहरण आता है यूरोप देशों का यूरोपीय यूनियन कंट्री इसमें सारे यूरोप देश तो नहीं आते हैं लेकिन कुछ देशों ने इसमें करार कर रखा है 1995 में कुछ देशों ने मिलकर यह करार किया और इस को नाम दिया है schengen area इस एग्रीमेंट के मुताबिक अगर एक देश का नागरिक दूसरे देश में जाकर लंबे समय के लिए नौकरी करना चाहता है तो उसके लिए बिना वीजा और कोई रुकावट के यह ऑफर खुले हैं इससे इन देशों की अर्थव्यवस्था में भी काफी सुधार आया है क्योंकि मान लीजिए इंडिया से कोई व्यक्ति घूमने के लिए यूरोप कंट्री में जाता है तो उसे एक ही वीजा पर इन सारे देशों को घूमने का मौका मिलता है

 

 

 

Schengen area

Schengen area के अंदर 27 देश आते हैं तथा कई और देश इसमें शामिल होना चाहते हैं यह दुनिया में पहला एक्सपेरिमेंट किया गया है और काफी हद तक इसे सफलता मिल चुकी है और इस संधि के मुताबिक यूरोप का टूरिज्म भी काफी बड़ा है क्योंकि कोई व्यक्ति एक देश के लिए वीजा अप्लाई करता है और उसे उसके साथ 27 देशों का वीजा फ्री मिलता है तो वह सारे देशों में थोड़ा थोड़ा घूमता है और इसके फलस्वरूप सारे देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव पड़ता है

 

 

इस स्कीम यूरोपीय देशों में काफी फायदा हुआ है कई देशों की अर्थव्यवस्था जोकि लचर होती जा रही थी वह हम इस स्कीम की वजह से एक अच्छी मुकाम पर खड़े हैं मगर हम इसे इंडिया की नजर से देखते हैं तो बिम्सटेक देशों में इसका अलग प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि यहां पर जनसंख्या ज्यादा होने की वजह से दूसरे देश में लोग ज्यादा पहुंच सकते हैं जिससे कई तरह की मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है

हम एक ऐसी दुनिया की कल्पना करते हैं कि कोई रोके रुकावट ना ना हो जब मन चाहे रकम को अदा करते ही दूसरे देश अपने काम के लिए जा सके मगर हम सपनों की दुनिया में नहीं रहते हकीकत में ऐसा नहीं होता एक लंबी प्रोसेस के बाद ही हमें वीजा प्राप्त होता है जिसके लिए बहुत समय और पैसे की जरूरत पड़ती है

 

अगर हम ऐसी दुनिया की कल्पना करते हैं तो उसका एक उदाहरण ओसियन वीजा पॉलिसी इसमें कुल 10 देश शामिल है जिनके नाम इस प्रकार है

आसियान देश में शामिल है मलेशिया इंडोनेशिया फिलीपींस वियतनाम कंबोडिया डेनमार्क ब्रूनेई दारुस्सलाम लाओ पीडीआर म्यांमार थाईलैंड इंडोनेशिया

 

आसियान देशों में यह संधि है कि यह अपने हिसाब से 30 दिन का या फिर जितना उन्हें ठीक लगे फ्री वीजा प्रोवाइड करते हैं इससे फायदा यह हुआ है कि इन देशों के टूरिज्म में भी बढ़ोतरी हुई है

अब हम बात करते हैं अपने देश इंडिया की कि हमें इस स्कीम का किस तरह से फायदा हो सकता है फायदा हो सकता है लेकिन यूरोपीय कंट्रीज की तरह इस स्कीम को लागू नहीं कर सकते क्योंकि और देशों के लोगों के लिए ऐसा नहीं कर सकते कि जब मर्जी आओ जब मर्जी जाओ कितने भी दिन के लिए रहो कोई रोके रुकावट नहीं इससे इंडिया में बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है हां हम आसियान देशों की तरह लहू कर सकते हैं की कुछ दिनों के लिए फ्री वीजा दिया जा सकता है 15 दिन 20 दिन किसी अन्य देश का नागरिक इंडिया में ट्रेवल कर सकता है इससे फायदा यह होगा कि इंडिया का टूरिज्म बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा

आप इमेजिन कीजिए कि कोई व्यक्ति जर्मनी का है और उसे बुद्धिस्ट टेंपल पर घूमना है और यह इंडिया नेपाल इंडोनेशिया श्रीलंका सब में पाए जाते हैं और अगर यह संधि पूरी हो जाती है तो वह एक वीजा पर सारे देश घूम सकता है और इससे सब देशों को फायदा होगा

 

फिलहाल के लिए तो अभी कुछ ऐसा नहीं है ना तो कोई रिटर्न में ऐसा प्रपोजल आया है ना ही कोई आदेश हुआ है एक सिर्फ सुझाव दिया गया है श्रीलंका के प्रेसिडेंट की तरफ से बाकी देखते हैं भविष्य में इस पर विचार किया जाएगा या नहीं बाकी आपकी हमारे पोस्ट से कुछ जानकारी मिली हो तो कमेंट करके बताएं

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